सपनों का विश्लेषण कैसे करें

सपनों का विश्लेषण कैसे करें . हम में से अधिकांश जानना चाहते हैं कि सपने का क्या मतलब है जो हमने देखा 12 वा भाव नींद से संबंधित है 3 रा भाव द्वारदश भाव से 4 था अर्थात नींद का सुख स्थान अथवा द्वारदश स्थान से प्राप्त चीज़ का भण्डारण भाव। अर्थात नींद में आये सपनो का भंडरान भाव हुआ तृत्य भाव 1 ) यदि किसी को स्वपन में हाथी, घोड़े, बड़ा सुसज्जित घर , सूंदर गहनों से सुसज्जित कोई स्त्री दिखे तो .उक्त सभी चीज़ चतुर्थ भाव के अंतर्गत आती है अर्थात लगन से चतुर्थ एवं तृत्य स्थान से द्वित्य भाव से जुड़े कारकत्वा देखे गए है जिसका अर्थ है नए घर का निर्माण ,पदोन्नति अथवा जीवन सुखशांति। 2 ) यदि किसी को अपने पूर्वज स्वपन में दिखाई दे अर्थात आपका पंचम स्थान तृत्य से तृत्य एवं लगन से पंचम भाव अर्थात ये समय उक्त जातक के लिए नयी विद्या का ज्ञान अर्जन के लिए है वही यदि पूर्वज धन दे रहे है अर्थात पंचम के साथ साथ लाभ स्थान अर्थात निकट भविष्य में कोई धन अर्जन के स्तोत्र बनेंगे यदि वो धन ले रहे है अर्थात आपका नुकसान द्वारदश स्थान। जिसका अर्थ है पंचम एवं द्वारदश स्थान आपका कोई नुकसान अथवा कार्य में परेशानी। 3 )यदि सपने में भगवान् के दर्शन हो अर्थात नवम स्थान तृत्य से सप्तम एवं लगन से नवम अर्थात जल्द ही अपने व्यवसाय का विस्तार होगा अथवा नए व्यापर के अवसर प्राप्त होंगे। भगवान् किस मुद्रा में है उसके लिए संभंधित भाव को भी देखना आवश्यक है 4 ) यदि सपने में सर्प , छिपकलियों या कीड़ों को देखते थे, जिसका मतलब है 8 वें भाव जो की तृत्य से षष्ट एवं लगन से अष्टम भाव जिसका मतलब है कि जल्द ही आपका सामना दुश्मन या स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों से होगा , आप अचानक बुरी घटना कह सकते हैं किन्तु यहाँ सबसे मुख्या है सरीसृप की स्थिति अनुसार अन्य भाव। यदि वो शुभ आये तो शत्रु बढ़ा आदि से मुक्ति भी। 5 )यदि सपने में मंदिर आये अर्थात 9 वें घर धर्म स्थान लगन से द्वारदश एवं तृत्य से दशम अर्थात शुभ कार्यों हेतु कर्म हेतु धार्मिक कार्य हेतु आपका खर्चा 6 )यदि सपने में जीवन साथी नजर आये अर्थात लगन से सप्तम एवं तृत्य से पंचम रिलेशनशिप को लेकर सुखद बाकी स्वप्न में अन्य स्थिति अनुसार जो भी भाव इंगित हो उसका भी फल। वैसे तो शकुन शास्त्र स्वपन शास्त्र आदि में बहुत कुछ लिखा गया है। किस समय आये स्वपन का क्या महत्व है। कोनसा स्वपन हक़ीक़त ने बदलेगा कोनसा नहीं इस परभी ऋषि मुनियो ने बहोत कुछ लिखा है। ये मेरा प्रयास मात्र है मेरी समझ अनुसार। लेख में त्रुटि हो क्षमा करे। एवं यदि असहमत हो तो मात्र एक लेख ही समझे।

Dinesh Yadav

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *