राहु एवं केतु देव

राहु एवं केतु देव ने राशि परिवर्तन किया है , बहुत से लोग खुश है बहुत से लोग डरे सहमे , ग्रह सदा चलायमान है ,   राहु देव माया के कारक ग्रह है वही केतु देव   मुक्ति ( अब ये मुक्ति जीवन की जो भी विकट परिस्थिति से मुक्ति भी है ) , डरने या खुश होने से पहले ध्यान रखे हर कुंडली  विशेष है। कोई भी गोचर सभी के जीवन में अलग अलग प्रभाव देने वाला है।  राहु देव जिस भी राशि में स्थित होते है उक्त राशि से सम्बन्धित कारकत्वों में वृद्धि कारक भी है जैसे की पूर्व का गोचर मिथुन राशि में काल पुरुष कुंडली का तृतीया स्थान होने स्वरुप सम्बन्ध रखती है कम्युनिकेशन , ऑनलाइन व्यवसाय आदि का आप  यदि  ध्यान से देखे तो पाएंगे कम्युनिकेशन एवं ऑनलाइन व्यवसाय में आशातीत वृद्धि पूरी दुनिया में हुयी थी। धनु राशि में जो की काल पुरुष कुंडली का नवम स्थान है होने स्वरुप धर्म से सम्बन्धी सबसे बड़े फैसले पूरी दुनिया में हुवे।  वर्तमान में उक्त गोचर वृष एवं वृश्चिक राशि में हो रहा है अर्थात मुख्या प्रभाव फाइनेंस , बैंकिंग  , पारीवारिक सम्बन्धी क्रियाकलापो में होगा वही केतु देव की स्थिति वृश्चिक राशि में होने स्वरुप भूविज्ञान , विज्ञान , पराविज्ञान , इंजीनियरिंग संबंधी क्रियाकलापों में देखने को मिलेगा। जिस भी भाव विशेष में राहु देव का गोचर होगा उक्त भाव संबंधी विशेष इच्छाएं प्रबल रूप से सामने होंगी यदि उक्त स्थिति में किसी को परेशानी हो तो माँ सरस्वती की आराधना किसी भी प्रकार की माया के पार जा कर आपको सद्बुद्धि प्रदान करने वाली है।  जिस भी भाव विशेष में केतु देव का गोचर होगा उक्त भाव सम्भान्धि विशेष परेशानी जो जीवन में हो उस से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा , यदि कोई परेशानी हो तो श्री गणेश की आराधना भ्रम की स्थिति को दूर कर जीवन में परेशानी से आपको दूर करेगी। जिन ग्रहो से राहु अथवा केतु त्रिकोण राशि से गोचर होंगे उक्त ग्रहो से सम्बन्ध रखने वाले कारकत्वों से जीवन में परिवर्तन मिलेगा जो की आवश्यक नहीं अशुभ हो।
    दिनेश यादव

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3 Comments

  1. आदरणीय श्री यादव सर एवम् शिखा मेम को मकर सक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएं एवम् राहु केतु संबंधी इतनी महत्वपूर्ण जानकारी साथ ही remedi भी देने के लिए अनेक बार धन्यवाद।

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