रामायण चौपाई एवं उनके उपयोग – By Dinesh Yadav

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कई वर्ष पूर्व मुझे किसी ने रामचरित मानस की चौपाइयों से मिलने वाले दिव्य फलो के बारे में बताया था। कल वापस मेरे सामने वही चौपाईआं उपयोग सामने आये , मुझे लगा ये अध्भुध जानकारी आप सभी से साँझा करनी चाहिए सभी के लाभार्थ। इन चौपायिओ को मंत्र की तरह विधान से पढ़ने के बारे में बताया गया है।

ऋद्धि सिद्ध की प्राप्ति के लिएइसके लिए रामायण के इस चौपाई का जाप करें जो इस प्रकार है-साधक नाम जपहिं लय लाएं।होहि सिद्धि अनिमादिक पाएं।।

परीक्षा में सफलता के लिएजेहि पर कृपा करहिं जनुजानी।कवि उर अजिर नचावहिं बानी।।मोरि सुधारहिं सो सब भांती।जासु कृपा नहिं कृपा अघाती।।लक्ष्मी की प्राप्ति के लिएजिमि सरिता सागर मंहु जाही।जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।तिमि सुख संपत्ति बिनहि बोलाएं।धर्मशील पहिं जहि सुभाएं।।

विद्या प्राप्ति के लिएगुरु ग्रह गए पढ़न रघुराई।अलपकाल विद्या सब आई।।ज्ञान प्राप्ति के लिएछिति जल पावक गगन समीरा।पंचरचित अति अधम शरीरा।।विपत्ति में सफलता के लिएराजिव नयन धरैधनु सायक।भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।।

दरिद्रता दूर करने हेतुअतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के ।कामद धन दारिद्र दवारिके।।

धन सम्पत्ति की प्राप्ति हेतुजे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं।सुख सम्पत्ति नानाविधि पावहिं।।

प्रेम वृद्धि के लिएसब नर करहिं परस्पर प्रीती।चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीती।।

सुख प्राप्ति के लिएसुनहि विमुक्त बिरत अरू विबई।लहहि भगति गति संपति नई।।

अकाल मृत्यु से बचनें के लिएनाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।लोचन निज पद जंत्रित प्रान केहि बात।।

रोगों से बचनें के लिएदैहिक दैविक भौतिक तापा।राम काज नहिं काहुहिं व्यापा।।

खोई हुई वस्तु पानें के लिएगई बहारे गरीब नेवाजू।सरल सबल साहिब रघुराजू।।

शत्रु को मित्र बनाने के लिएगरल सुधा रिपु करहि मिताई।गोपद सिंधु अनल सितलाई।।

भूत-प्रेत के के डर को भगानें के लिएप्रनवउ पवन कुमार खल बन पावक ग्यान धुन।

जासु हृदय आगार बसहि राम सर चाप घर।।सफल यात्रा के लिएप्रबिसि नगर कीजै सब काजा।हृदय राखि कौशलपुर राजा।।

ईश्वर से क्षमा मागनें के लिएअनुचित बहुत कहेउं अग्याता।छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।।

Dinesh Yadav 

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